केदारघाटी में घूम रहे कबाड़ी, फेरी सहित बाहरी मजदूरों का अनिवार्य हो सत्यापन

केदारघाटी में शीतकाल में कबाड़ी, फेरी सहित बाहरी मजदूरों का चलाया जाय सत्यापन अभियान
केदारघाटी। बाबा केदारनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद होते ही केदारनाथ यात्रा पड़ाव सुनसान नजर आने लगते हैं। जिसे लेकर स्थानीय व्यापारियों एवं ग्रामीणों ने जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन से बाहरी मजदूरों एवं नेपाली मूल के लोगों का सत्यापन अभियान चलाने की मांग की है।
बता दें, कि केदारनाथ यात्रा के दौरान यात्रा पड़ावों में आवाजाही बनी रहती है, परन्तु बाबा के कपाट शीतकाल के लिए बंद होते ही यात्रा पड़ावों पर सूनापन नजर आने लगता है। जिस से पड़ावों में सुरक्षा को लेकर व्यवसाई एवं ग्रामीण चिंतित नजर आते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि बीते कुछ वर्षों से केदारघाटी में भवन निर्माण एवं सड़क निर्माण कार्यों में कई बाहरी मजदूर केदारघाटी में पहुंचते हैं। इसके साथ ही कबाड़ी एवं फेरी का कार्य करने वाले भी अब अपने कार्यों में सक्रिय हो जाते हैं जो कि प्रतिदिन बाजारों एवं गांवों की ओर आते दिखाई देते हैं। इसी को देखते हुए स्थानीय ग्रामीणों एवं व्यापारियों ने सत्यापन अभियान शुरू करने की मांग की है।
ग्राम प्रधान रविग्राम फाटा रामेश्वर प्रसाद जमलोकी ने बताया कि शीतकाल में बाहरी मजदूर भवन निर्माण एवं अन्य कार्यों हेतु आने शुरू हो जाते हैं इसके साथ ही फेरी और कबाड़ी बिना सत्यापन के ही गांवों में नजर आते हैं, उन्होंने इनका सत्यापन करवाने की मांग की है। व्यापार संघ अध्यक्ष गौरीकुंड रामचंद्र गोस्वामी ने बताया कि बाबा केदार के कपाट बंद होते ही यात्रा पड़ावों पर दुकानें एवं होटल बंद हो जाते हैं जिस से पड़ाव बिल्कुल सूने बने रहते हैं, वहीं गौरीकुंड क्षेत्र में चल रहे निर्माण कार्य एवं केदारनाथ पैदल मार्ग व धाम में पुनः निर्माण कार्यों में लगे मजदूरों की आवाजाही अब बनी रहती है। सुरक्षा को देखते हुए इन सभी का सत्यापन आवश्यक है।
भैरव सेना जिलाध्यक्ष अशोक सेमवाल ने बताया कि उनके द्वारा पुलिस प्रशासन से लगातार कबाड़ी का कार्य एवं फेरी का कार्य करने वाले बाहरी लोगों का सत्यापन करने की मांग की जाती है। उन्होंने कहा कि कतिपय बार ये बिना सत्यापन के गांवों में चले जाते हैं।
उन्होंने सभी बाहरी मूल के लोगों का सत्यापन अभियान चलाने की मांग की है।



