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पशुओं में एक्वाइन इन्फ्लूएंजा वायरस की शिकायत होने पर 24 घंटे के लिए घोड़े-खच्चरों की आवाजाही पर रोक, जिला प्रशासन ने तीर्थयात्रियों से किया आग्रह डंडी कंडी और पालकी के साथ ही पैदल चलकर पहुंचे केदारनाथ धाम,

पशुओं में एक्वाइन इन्फ्लूएंजा वायरस की शिकायत होने पर 24 घंटे के लिए घोड़े-खच्चरों की आवाजाही पर रोक, जिला प्रशासन ने तीर्थयात्रियों से किया आग्रह

डंडी कंडी और पालकी के साथ ही पैदल चलकर पहुंचे केदारनाथ धाम,

रुद्रप्रयाग। केदारनाथ पैदल मार्ग में संचालित हो रहे घोड़े-खच्चरों में से कुछ पशुओं में एक्वाइन इन्फ्लूएंजा वायरस की शिकायत आने पर 24 घंटे के लिए घोड़े-खच्चरों की आवाजाही पर रोक लगा दी। जिला प्रशासन की ओर से तीर्थयात्रियों से आग्रह किया गया है कि वे डंडी-कंडी के साथ पालकी का सहारा लें। साथ ही पशु संचालकों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे अपने पशुओं का संचालन ना करें। ऐसा करने पर उनके विरूद्ध वैधानिक कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।

केदारनाथ यात्रा को शुरू हुए अभी कुछ दिन ही हुए हैं। कुछ घोड़े-खच्चरों में विगत माह मार्च में एक्वाइन इन्फ्लूएंजा एक विषाणुजनित बीमारी के संक्रमण की पुष्टि राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान संस्थान हिसार ने की थी और कतिपय पशुओं में लक्षण भी दृष्टिगोचर हुए थे, जिसमें मुख्य रूप से आंखों में पानी आना, नाक से पानी बहना, छिंकना, खांसना एवं ज्वर के लक्षण प्रमुख थे, जिसके बाद सभी पशुओं के सीरोलॉजिकल परीक्षण कराए गए थे एवं नेगेटिव रिपोर्ट वाले पशुओं को ही यात्रा में प्रतिभाग की अनुमति दी गई थी, मगर गत दिवस यात्रा मार्ग में पशुओं की मृत्यु होने और कतिपय पशुओं में नाक से पानी बहना, आंख से पानी बहना, खांसने के लक्षण पाए गए हैं।

मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ आशीष रावत ने बताया कि पशुओं की मृत्यु को रोकने और इसकी जांच के लेकर भारत सरकार से वैज्ञानिकों का एक दल कल रुद्रप्रयाग पहुंच जाएगा। ऐसे में निर्णय लिया गया है कि आगामी 24 घंटे में पशुओं के संचालन पर पूर्णतया रोक रहेगी, जिस दौरान अस्वस्थ पशुओं को पृथक कर क्वारंटाइन किया जाएगा एवं राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान संस्थान हिसार को प्रेषित की गई जांच रिपोर्ट आने तक रोक जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि रोक हटाने संबंधी निर्णय जांच रिपोर्ट आने के बाद ही लिया जाएगा। इसके अलावा उन्होंने यह भी बताया कि अधिनियम के प्राविधानों के अनुसार अस्वस्थ पशु को अलग रखने एवं अस्वस्थ पशु से कार्य ना कराने का उत्तर दायित्व पूर्णतः पशु मालिक का होगा एवं यदि ऐसा किया जाता है तो संबंधित पशु मालिक के विरूद्ध वैधानिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।

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