केदारघाटी के लिए सौगात, मंदाकिनी नदी पर कुंड में वैली ब्रिज पर आवाजाही शुरू

बिपिन सेमवाल
गुप्तकाशी। राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग द्वारा कुंड में वैकल्पिक मॉडर्न वैली ब्रिज पर आवाजाही शुरू होने से आम जनमानस ने राहत की सांस ली है। मिनिस्ट्री ऑफ ट्रांसपोर्ट एंड हाइवे द्वारा आवंटित धनराशि से उक्त पुल का निर्माण किया गया है। लगभग 5 करोड़ 61 लाख धनराशि का मॉडर्न बेली ब्रिज लगभग 40 टन से अधिक भार उठाने में सक्षम है। इसका दूसरा प्रत्यक्ष लाभ यह भी है, कि यदि आगामी दिनों में पुराने ब्रिज के स्थान पर नया ब्रिज बन गया तो इस बेली ब्रिज के तमाम पार्ट्स को निकालकर अन्य स्थानों पर भी ले जाया जा सकता है। स्टेनलेस स्टील से निर्मित यह पुल दिखने में हालांकि काफी हल्का है, लेकिन यह 40 टन से अधिक भार को सहजता से उठा सकता है।
दरअसल, मंदाकिनी नदी पर कुंड नामक स्थान में वर्ष 1972 में लोहे के ब्रिज का निर्माण हुआ था। वर्ष 2013 की केदारनाथ आपदा के दौरान इस ब्रिज के गुप्तकाशी साइड का पुस्तक आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो चुका था , जिसे संबंधित विभाग द्वारा युद्धस्तर पर कार्य करके क्षतिग्रस्त पुश्तों पर सुरक्षात्मक कार्य किया गया। लेकिन उसके बाद वर्ष 2024 में रुद्रप्रयाग साइड से 40 फीसद पुश्ते क्षतिग्रस्त हो चुके थे, जिस कारण सुरक्षात्मक दृष्टि से वाहनों को विद्यापीठ मोटर मार्ग से गुप्तकाशी डायवर्ट किया गया। हालांकि हल्के वाहनों के लिए कुछ दिन के लिए उक्त पुल यातायात के लिए सुचारु रहा। विभाग द्वारा भारी बरसात के बाद भी इस स्थान पर पक्की सुरक्षा दीवार निर्मित की गई इसके बाद उक्त पुल को आवाजाही के लिए खोल दिया गया। काफी पुराना होने के कारण इस स्थान की संवेदनशीलता को देखते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग ने इसी पुल के दाएं भाग में मॉडर्न ब्रिज निर्मित किया है। अधिशासी अभियंता ओंकार पांडे ने बताया कि महज कुछ ही महीने में उक्त ब्रिज को बनाया गया है। और इस पर अब वाहनों की आवाजाही शुरू हो चुकी है। श्री पांडे ने बताया कि आगामी कुछ दिनों में पुराने पुल के स्थान पर नया पुल निर्मित किए जाने को लेकर टेंडर आमंत्रित किए जाएंगे। शीघ्र ही उक्त स्थान पर नए स्थाई लोहे का ब्रिज बनकर तैयार होगा। श्री पांडे ने बताया कि बेली ब्रिज को उसके बाद निकाल कर सुरक्षित रखा जाएगा आपातकाल की स्थिति में इसे अन्य जगहों पर भी स्थानांतरित किया जा सकता है।



