क्यूंजा घाटी के युवा कवि सतपाल की कृति का जीआईसी चन्द्रनगर में हुआ विमोचन

लक्ष्मण सिंह नेगी।
‘पूरा केदार दर्शन’ पुस्तक में समाहित है केदारभूमि की आध्यात्मिक विरासत : भट्ट
ऊखीमठ। क्यूंजा घाटी के युवा लेखक एवं कवि सतपाल की पुस्तक ‘पूरा केदार दर्शन’ का विमोचन समारोह राजकीय इंटर कॉलेज चन्द्रनगर में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बीच धूमधाम से सम्पन्न हुआ। समारोह में सीमांत क्षेत्र अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष चण्डी प्रसाद भट्ट ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करते हुए पुस्तक का विमोचन किया। उन्होंने कहा कि केदारभूमि केवल धार्मिक आस्था का केन्द्र ही नहीं, बल्कि समृद्ध लोक संस्कृति, परम्पराओं और आध्यात्मिक चेतना की धरोहर भी है। ऐसे में स्थानीय युवा लेखक द्वारा केदार क्षेत्र के धार्मिक एवं सांस्कृतिक वैभव को शब्दों में संजोना सराहनीय प्रयास है।
केदारनाथ विधायक श्रीमती आशा नौटियाल प्रतिनिधि जिला पंचायत सदस्य सतेराखाल गम्भीर बिष्ट कहा कि साहित्य समाज का दर्पण होने के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए अपनी जड़ों से जुड़ने का माध्यम भी है। ‘पूरा केदार दर्शन’ जैसी कृतियां क्षेत्र की धार्मिक पहचान, लोक परम्पराओं और सांस्कृतिक विरासत को व्यापक पाठक वर्ग तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। विमोचन समारोह में नगरपालिका अध्यक्ष सन्तोष रावत, जिला पंचायत सदस्य कण्डारा अजयवीर भण्डारी, चोपता सम्पन्न नेगी, त्रिभुवन चौहान व सामाजिक कार्यकर्ता आलोक बगवाडी ने भी विचार रखें ।
विमोचन समारोह में क्षेत्र के कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज में तेजी से आ रहे बदलावों पर तीखे एवं गहरे व्यंग्य किए। उनकी कविताओं में बदलते सामाजिक सरोकार, मानवीय संवेदनाओं में आ रही कमी, आधुनिक जीवनशैली तथा पहाड़ की मौलिक संस्कृति के सामने खड़ी चुनौतियों की प्रभावी अभिव्यक्ति देखने को मिली। कवियों की प्रस्तुतियों पर सभागार में मौजूद साहित्यप्रेमियों ने खूब तालियां बजाईं।
समारोह का एक महत्वपूर्ण पक्ष साहित्य एवं समाज के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले पत्रकारों, साहित्यकारों और समाजसेवियों का सम्मान रहा। आयोजकों ने विभिन्न क्षेत्रों में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने वाले व्यक्तित्वों को सम्मानित कर उनके योगदान को रेखांकित किया। कार्यक्रम में स्थानीय महिला मंगल दलों की महिलाओं ने पारम्परिक लोकगीत एवं लोकनृत्यों की मनोहारी प्रस्तुतियां देकर पहाड़ी संस्कृति के रंग बिखेरे। वहीं क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने भी सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। पारम्परिक लोक संस्कृति और विद्यालयी प्रतिभाओं के सुंदर समन्वय से समारोह देर तक जीवंत बना रहा।
लेखक एवं कवि सतपाल ने पुस्तक की रचना के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि केदार क्षेत्र की धार्मिक, सांस्कृतिक एवं लोक परम्पराओं को साहित्य के माध्यम से संजोने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि पुस्तक के माध्यम से पाठकों को केदारभूमि के विविध धार्मिक स्थलों और उनसे जुड़ी मान्यताओं से परिचित कराने का प्रयास किया गया है। समारोह में साहित्यकारों, कवियों, पत्रकारों, जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों, शिक्षक-शिक्षिकाओं, महिला मंगल दलों के सदस्यों तथा बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीणों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम ने जहां ‘पूरा केदार दर्शन’ को पाठकों के समक्ष पहुंचाया, वहीं क्षेत्र की साहित्यिक और सांस्कृतिक चेतना को भी एक साझा मंच प्रदान किया। कार्यक्रम का संचालन हर्ष थपलियाल व पंकज सिंह कठैत ने संयुक्त रूप से किया। इस मौके पर साहित्यकार मजोज हटवाल, कान्ति प्रसाद डिमरी, पी के रुदियाल, पूर्व जिला पंचायत सदस्य देवेश्वरी नेगी, आशुतोष भण्डारी, बृजमोहन नेगी, राजनारायण राणा, देवेश्वरी सेमवाल, विलोचना रावत, अरूणा नौटियाल, पूनम बडियारी, सुधीर बर्त्वाल, आशुतोष नेगी, मनोज वैष्णव, मनोज बिष्ट, आरती रावत, हैप्पी असवाल, राहुल पंवार सहित भारी संख्या में जनप्रतिनिधि व ग्रामीण मौजूद रहे।



