
लक्ष्मण सिंह नेगी।
ऊखीमठ नगर भ्रमण के बाद तुंगनाथ घाटी की ओर प्रस्थान करेगी दिवारा यात्रा ।
ऊखीमठ। कालीमठ घाटी की भगवती चामुण्डा की तृतीय चरण की दिवारा यात्रा रविवार को भगवान केदारनाथ के शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ पहुंची। दिवारा यात्रा के ओंकारेश्वर मंदिर पहुंचते ही वातावरण भक्तिभाव से ओतप्रोत हो उठा। मंदिर परिसर में सैकड़ों श्रद्धालु इस अलौकिक धार्मिक क्षण के साक्षी बने।
भगवती चामुण्डा की दिवारा यात्रा और ओंकारेश्वर महादेव का मिलन इस यात्रा का विशेष धार्मिक पड़ाव माना जा रहा है। मान्यता और परंपरा के अनुसार 15 वर्षों के अंतराल के बाद हुए इस ऐतिहासिक मिलन को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया। देवी के आगमन पर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया तथा ढोल-दमाऊं और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज के बीच मां चामुण्डा और ओंकारेश्वर महादेव का पूजन-अर्चन कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि एवं लोकमंगल की कामना की।
दिवारा यात्रा के ओंकारेश्वर मंदिर पहुंचने पर स्थानीय श्रद्धालुओं और ग्रामीणों में भी विशेष उल्लास देखने को मिला। मंदिर परिसर में देर तक भक्ति की धारा प्रवाहित होती रही। देवी-देवताओं के पारंपरिक मिलन के इस अवसर ने केदारघाटी की समृद्ध धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को एक बार फिर जीवंत कर दिया। श्रद्धालुओं ने मां चामुण्डा से परिवार, गांव और समूचे क्षेत्र की खुशहाली का आशीर्वाद मांगा।
ऊखीमठ नगर का भ्रमण करेगी यात्रा
ओंकारेश्वर मंदिर में धार्मिक अनुष्ठानों और देव मिलन के बाद भगवती चामुण्डा की दिवारा यात्रा ऊखीमठ नगर का भ्रमण करेगी। नगर भ्रमण के दौरान देवी विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं को दर्शन एवं आशीर्वाद देंगी। यात्रा को लेकर नगर क्षेत्र में भी विशेष उत्साह बना हुआ है। श्रद्धालु मां चामुण्डा के दर्शनों के लिए मार्ग में प्रतीक्षा करेंगे और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ देवी का स्वागत करेंगे।
ऊखीमठ नगर भ्रमण के उपरांत दिवारा यात्रा तुंगनाथ घाटी की ओर प्रस्थान करेगी। तुंगनाथ क्षेत्र में यात्रा के पहुंचने पर विभिन्न गांवों और धार्मिक स्थलों में श्रद्धालुओं द्वारा देवी का स्वागत किया जाएगा। यात्रा के दौरान लोक आस्था, देव परंपरा और सदियों से चली आ रही पौराणिक मान्यताओं का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।
तुंगनाथ घाटी के बाद बदरीनाथ धाम की ओर बढ़ेगी यात्रा
तुंगनाथ घाटी के भ्रमण के बाद भगवती चामुण्डा की दिवारा यात्रा भू-वैकुण्ठ मोक्षधाम बद्रीनाथ के लिए रवाना होगी। बद्रीनाथ धाम में भगवती चामुण्डा और भगवान बद्रीनाथ के बीच होने वाला धार्मिक मिलन भी इस दिवारा यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव रहेगा। वर्षों बाद होने वाले इन देव मिलनों को लेकर श्रद्धालुओं में गहरी आस्था और उत्सुकता बनी हुई है। दिवारा यात्रा समिति अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह सत्कारी ने बताया कि दिवारा यात्रा के माध्यम से भगवती चामुण्डा विभिन्न गांवों और घाटियों का भ्रमण करते हुए श्रद्धालुओं की कुशलक्षेम पूछ रही हैं। देव डोली के साथ चल रहे श्रद्धालुओं के लिए यह यात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि अपनी जड़ों, लोकसंस्कृति और देव परंपरा से जुड़ने का भावपूर्ण अवसर भी बनी हुई है। यात्रा के प्रत्येक पड़ाव पर उमड़ रहा जनसैलाब क्षेत्र की जीवंत लोक आस्था का प्रमाण दे रहा है। इस मौके पर आचार्य राजेन्द्र प्रसाद देवशाली, सत्यानंद भट्ट, अनूप भट्ट, अमित भट्ट, दिवारा समिति संरक्षक कृपाल सिंह राणा, सलाहकार त्रिलोक सिंह रावत, रामचन्द्र सिंह राणा, उपाध्यक्ष सुरेन्द्र सिंह तिन्दोरी, सचिव कीरत सिंह राणा, सहसचिव राजेन्द्र सिंह राणा, कोषाध्यक्ष योगम्बर सिंह रावत मौजूद रहे।



